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बिहार में खान विभाग की राजस्व वसूली पर सवाल, अवैध खनन पर कार्रवाई के बावजूद रिकॉर्ड कम

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बिहार में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई हुई, लेकिन खान एवं भू-तत्व विभाग ने राजस्व वसूली में पिछड़ कर पिछले 3 साल का सबसे कम प्रदर्शन किया।

पटना, आलम की खबर: बिहार में अवैध खनन पर पिछले सालों में कई बड़ी कार्रवाई की गई, हजारों लोगों और वाहनों को जब्त किया गया, लेकिन खान एवं भू-तत्व विभाग ने अपनी राजस्व वसूली में पिछड़ कर पिछले तीन सालों में सबसे कम प्रदर्शन किया है। यह खुलासा गुरुवार को खान एवं भू-तत्व विभाग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ, जिसमें विभाग के मंत्री विजय सिन्हा और निदेशक मनेश कुमार मीणा ने विभाग की वित्तीय स्थिति और अवैध खनन पर कार्रवाई की जानकारी दी।

विभाग ने बताया कि 2024-25 में 3500 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य था और वह 3536 करोड़ रुपये हासिल कर चुके थे। वहीं, इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3850 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया, लेकिन विभाग केवल 3592 करोड़ रुपये ही वसूल करने में सफल रहा, जो लक्ष्य का 93% है। यह पिछले तीन साल में सबसे कम राजस्व वसूली का आंकड़ा है।

खान एवं भू-तत्व विभाग ने अवैध खनन रोकने के लिए पिछले एक साल में राज्य में 50 हजार से अधिक छापेमारी की। इन छापेमारियों में कुल 2727 FIR दर्ज की गई, 6214 वाहन जब्त किए गए और इनसे 82.06 करोड़ रुपये की वसूली हुई। साथ ही, इन मामलों में 806 लोगों को गिरफ्तार किया गया। विभाग ने अवैध खनन में शामिल वाहनों पर 1 से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया, लेकिन जुर्माने वसूलने में अभी भी सुस्ती दिखाई दे रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री विजय सिन्हा ने दावा किया कि उन्होंने खान एवं भू-तत्व विभाग को सशक्त, प्रभावशाली और रोजगार-सृजन तथा राजस्व बढ़ाने वाले विभाग में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अब अवैध खनन गतिविधियों पर कड़ी रोक है, बालूघाटों पर मॉनिटरिंग बढ़ गई है और पहले संवेदक ऊंची बोली पर टेंडर हासिल कर ओवरलोडिंग करते थे, अब यह बंद हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि संवेदक अब टेंडर को सरेंडर कर रहे हैं, क्योंकि नियमों और निगरानी के चलते ओवरलोडिंग संभव नहीं रही।

मंत्री ने आगे कहा कि विभाग बहुत जल्द पत्थर खनन पट्टा जारी करेगा, जिससे दूसरे राज्यों से पत्थर लाने की आवश्यकता घटेगी और राजस्व में वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि उनके नेतृत्व में विभाग का लक्ष्य अब सिर्फ अवैध खनन रोकना नहीं, बल्कि राजस्व वसूली और कानूनी प्रक्रिया के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध खनन और रेत-पत्थर के अवैध परिवहन पर नियंत्रण के लिए ट्रांजिट पास अनिवार्य किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दूसरे राज्यों से आने वाले रेत और पत्थर पर पूरी निगरानी रहे और राजस्व का नुकसान न हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि विभाग ने अवैध खनन रोकने में बड़ी कार्रवाई की है, लेकिन राजस्व वसूली के मामले में पिछड़ना चिंता का विषय है। पिछले तीन साल में यह सबसे कम वसूली है, जबकि छापेमारी और गिरफ्तारियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर की रही। इसके पीछे राज्य में अवैध खनन, दूसरे राज्यों से रेत और पत्थर की खरीद बढ़ने जैसे कारण भी सामने आए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री विजय सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग अब केवल दंडात्मक कार्रवाई पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि नियमों के तहत ट्रांसपेरेंसी, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और ट्रांजिट पास व्यवस्था के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम अवैध गतिविधियों पर रोक के साथ-साथ सरकार की आमदनी बढ़ाने में भी मदद करेगा।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल 3850 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 3592 करोड़ रुपये ही वसूल हुए। यह राजस्व वसूली में 3 साल का सबसे कम आंकड़ा है। मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि विभाग ने हाल ही में राजस्व वसूली के लिए कई नए नियम और निगरानी तंत्र लागू किए हैं, जिससे भविष्य में लक्ष्य प्राप्ति में सुधार संभव है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी सामने आया कि अवैध खनन में शामिल वाहनों को जब्त करने और जुर्माना लगाने के बावजूद, जुर्माने वसूलने में विभाग सुस्त दिखा। मंत्री ने कहा कि इसका कारण प्रशासनिक प्रक्रिया और कानूनी बाधाएं हैं, लेकिन अब नए कदमों के तहत यह प्रक्रिया सरल और तेज होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में खान एवं भू-तत्व विभाग ने अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई जरूर की, लेकिन राजस्व वसूली के आंकड़े विभाग की नाकामी को दिखाते हैं। मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि अवैध खनन पर रोक लगाना और ट्रांसपोर्ट पर निगरानी बढ़ाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जल्द ही राजस्व वसूली और पेट्रोलियम खनन से संबंधित नई पहल से राज्य को और फायदा होगा।

अंत में, मंत्री ने कहा कि राज्य में अवैध खनन के मामलों में अब संवेदकों की हिम्मत पस्त हो गई है। ओवरलोडिंग, ऊंची बोली और अवैध गतिविधियों पर कड़ी रोक है। इसके साथ ही, पत्थर और रेत की खरीद पर नियंत्रण बढ़ाने और ट्रांजिट पास के जरिए निगरानी बढ़ाने से राजस्व वसूली में सुधार की उम्मीद है।

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